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महोब्बत और नफरत सब मिल चुके हैं मुझे; मैं अब तकरीबन मुकम्मल हो चोका हूँ!
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रेत पर नाम कभी लिखते नहीं; रेत पर नाम कभी टिकते नहीं; लोग कहते है कि हम पत्थर दिल हैं; लेकिन पत्थरों पर लिखे नाम कभी मिटते नहीं!
माना आज उन्हें हमारा कोई ख़याल नहीं; जवाब देने को हम राज़ी है, पर कोई सवाल नहीं! पूछो उनके दिल से क्या हम उनके यार नहीं; क्या हमसे मिलने को वो बेकरार नहीं!
आज असमान के तारों ने मुझे पूछ लिया; क्या तुम्हें अब भी इंतज़ार है उसके लौट आने का! मैंने मुस्कुराकर कहा; तुम लौट आने की बात करते हो; मुझे तो अब भी यकीन नहीं उसके जाने का!
प्यार कमजोर दिल से किया नहीं जा सकता! ज़हर दुश्मन से लिया नहीं जा सकता! दिल में बसी है उल्फत जिस प्यार की! उसके बिना जिया नहीं जा सकता!
मोहब्बत ऐसी थी कि उनको दिखाई न दी! चोट दिल पर थी इसलिए दिखाई न गयी! चाहते नहीं थे उनसे दूर होना पर! दुरिया इतनी थी कि मिटाई न गयी!
उदास नहीं होना, क्योंकि मैं साथ हूँ! सामने न सही पर आस-पास हूँ! पल्को को बंद कर जब भी दिल में देखोगे! मैं हर पल तुम्हारे साथ हूँ!